Introduction
Numerology is the study of numbers, and its impact on human being life as an integral part of the cosmic plan. Numbers start impact from the start of the birth, based on native birth date and the complete name (as in government record) as inputs to unlock all the secrets that the numbers hold. In Numerology chart will plot based on the numbers present out of 9 numbers used in constructing numerology charts also called Numeroscope. For finding the name number, each alphabetical letter has been assigned a numerical value that provides a related cosmic vibration & calculated native personal name number. Numerology supports to find and reflect the characteristics of a person, talents, motivations, success in life and path in life.
The first input in numerology is date of birth as: DD / MM / YYYY used to find out about the life path of a person as his Driver Number or Mulank from sum of dd & another Conductor Number is sum of dd + mm + yyyy convert in single digit also called Bhagyank. Apart from this there are many factors influencing the life of paerson have been computed and draw a chart as:

The Chaldean System of numerology is related to the Vedic System of India, indicating that every letter has a unique vibration. Numbers are assigned to letters based on the vibrational value. In the Pythagorean System of numerology numbers are assigned by sequence numeric values from 1 to 8, as shown below. Pythagorean System is mostly used in Numerology in western world, as it is like destiny number, life path number, etc. which help to know about the destiny of a native. Pythagoras identified that each planet has its own positive and negative characteristics same as numbers classified as introvert or extrovert, struggle or successful life, etc.

After finding the Driver & Conductor of a person, based on above table find the Name Number, which should be compatible with both Driver & Conductor. This will enhance the luck factor & success in life.
क्या है अंक ज्योतिष?
अंक ज्योतिष, ज्योतिष शास्त्र की तरह ही एक ऐसा विज्ञान है जिसमें अंकों की मदद से व्यक्ति के भविष्य के बारे में जानकारी दी जाती है। अंक ज्योतिष में जातक की जन्म तिथि के आधार पर मूलांक निकालकर उसके भविष्य फल की गणना की जाती है। अंक ज्योतिष वास्तव में अंकों और ज्योतिषीय तथ्यों का मेल कहलाता है। अंक 1 से 9 होते हैं, ज्योतिष शास्त्र मुख्य रूप से तीन मुख्य तत्वों पर आधारित होते हैं: ग्रह, राशि और नक्षत्र। लिहाजा अंक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का मिलान सभी नौ ग्रहों, बारह राशियां और 27 नक्षत्रों के आधार पर किया जाता है। वैसे देखा जाए तो व्यक्ति के अमूमन सभी कार्य अंकों के आधार पर ही किये जाते हैं। अंक के द्वारा ही साल, महीना, दिन, घंटा, मिनट और सेकंड जैसी आवश्यक चीजों को व्यक्त किया जाता है।
जन्म के दौरान ग्रहों की स्थिति के अनुसार ही जातक का व्यक्तित्व निर्धारित होता है। प्रत्येक व्यक्ति के जन्म के समय एक प्राथमिक और एक द्वितीयक ग्रह उस पर शासन करता है। इसलिए, जन्म के बाद जातक पर उस अंक का प्रभाव सबसे अधिक होता है, और यही अंक उसका स्वामी कहलाता है। व्यक्ति के अंदर मौजूद सभी गुण जैसे की उसकी सोच, तर्क शक्ति, दर्शन, इच्छा, द्वेष, स्वास्थ्य और करियर आदि अंक शास्त्र के अंकों और उसके साथी ग्रह से प्रभावित होते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि दो व्यक्तियों का मूलांक एक ही हो तो दोनों के बीच परस्पर तालमेल अच्छा होता है।
अंक ज्योतिष का इतिहास
मिस्र के मशहूर गणितज्ञ पाइथागोरस ने सबसे पहले अंको के महत्व के बारे में दुनिया को बताया था। उन्होनें कहा था कि “अंक ही ब्रह्मांड पर राज करते हैं।” अर्थात अंकों का ही महत्व संसार में सबसे ज्यादा है। प्राचीन काल में अंक शास्त्र की जानकारी खासतौर से भारतीय, ग्रीक, मिस्र, हिब्रु और चीनियों को थी। भारत में प्रचीन ग्रंथ “स्वरोदम शास्त्र” के ज़रिये अंक शास्त्र के विशेष उपयोग के बारे में बताया गया है।
अंकशास्त्र का महत्व
ज्योतिषशास्त्र की तरह ही अंक ज्योतिष या अंक शास्त्र की मदद से किसी व्यक्ति में विधमान गुण, अवगुण, व्यवहार और विशेषताओं के बारे में जानकारी प्राप्त की जा सकती है। इसके माध्यम से शादी से पहले भावी पति पत्नी का मूलांक निकालकर उनके गुणों का मिलान भी किया जा सकता है। आजकल देखा गया है कि अंकशास्त्र का प्रयोग वास्तुशास्त्र में भी करते हैं। नए घर का निर्माण करते वक़्त सभी अंकों का भी विशेष ध्यान रखा जाता है। उदाहरण स्वरूप घर में कितनी सीढ़ियां होनी चाहिए, कितनी खिड़कियाँ और दरवाज़े होनी चाहिए इसका निर्धारण अंक शास्त्र के माध्यम से ही किया जाता है। इसके साथ ही सफलता प्राप्ति के लिए भी लोग इस विद्या का प्रयोग कर अपने नाम की स्पेलिंग में भी परिवर्तन कर रहे हैं।
मूलांक का अंक ज्योतिष में महत्व
मूलांक में मुख्य रूप से अंकों का प्रयोग तीन तरीके से किया जाता है:
मूलांक: किसी व्यक्ति की जन्म तिथि को एक-एक कर जोड़ने से जो अंक प्राप्त होता है वो उस व्यक्ति का मूलांक कहलाता है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी व्यक्ति कि जन्म तिथि 28 है तो 2+8 =10, 1 +0 =1, तो व्यक्ति का मूलांक 1 होगा।
भाग्यांक: किसी व्यक्ति की जन्म तिथि, माह और वर्ष को जोड़ने के बाद जो अंक प्राप्त होता है वो उस व्यक्ति का भाग्यांक कहलाता है। जैसे यदि किसी व्यक्ति की जन्म तिथि 10-12-1969 है तो उस व्यक्ति का भाग्यांक 1+0+1+2+1+9+6+9 = 29, 2+9 = 11 = 1+1 = 2, अर्थात इस जन्मतिथि वाले व्यक्ति का भाग्यांक 2 होगा।
नामांक: किसी व्यक्ति के नाम से जुड़े अक्षरों को जोड़ने के बाद जो अंक प्राप्त होता है, वो उस व्यक्ति का नामांक कहलाता है। उदाहरण स्वरूप यदि किसी का नाम “SUJIT” है तो इन अक्षरों से जुड़े अंकों को जोड़ने के बाद ही उसका नामांक निकला जा सकता है। SUJIT = 3+6+1+1+4 = 15 = 1+5 = 6 लिहाजा इस नाम के व्यक्ति का नामांक 6 होगा।
हर अक्षर से जुड़े अंक का विवरण निम्नलिखित है :
| A | B | C | D | E | F | G | H | I | J | K | L | M | N | O | P | Q | R | S | T | U | V | W | X | Y | Z |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 8 | 3 | 5 | 1 | 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 7 | 8 | 1 | 2 | 3 | 4 | 6 | 6 | 6 | 5 | 1 | 7 |
किसी भी व्यक्ति का मूलांक और भाग्यांक ये दोनों ही उसके जन्म तिथि के आधार पर निकाले जानते हैं, इसे किसी भी हाल में बदला नहीं जा सकता है। अंक शास्त्र के अनुसार यदि किसी का नामांक, मूलांक और भाग्यांक से मेल खाता हो तो ऐसे व्यक्ति को जीवन में अप्रत्याशित मान, सम्मान, खुशहाली और समृद्धि मिलती है। बहरहाल आजकल लोग अपने नाम की स्पेलिंग बदलकर अपने नामांक को मूलांक या भाग्यांक से मिलाने का प्रयास करते हैं। इसमें उन्हें सफलता भी मिलती है और जीवन सुखमय भी बीतता है।
अंक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र
अंक शास्त्र ज्योतिषशास्त्र की तरह ही एक प्राचीन विद्या है। ये दोनों ही एक दूसरे से परस्पर जुड़े हुए हैं। भविष्य से जुड़ी किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए अंक ज्योतिष विद्या या ज्योतिषशास्त्र का ही प्रयोग किया जाता है। आजकल अंक शास्त्र की मदद से लोग विशेष रूप से कुछ कामों में अंकों की मदद लेते हैं। जैसे की लाटरी निकलने में या फिर मकान का अलॉटमेंट करने के लिए।
Crystal Healing
Crystal healing is a substitute way of treatment against disease by using crystals and stones other than medical technique as natural approach. Crystals are kept on appropriate part of a body for healing and permitting positive, healing energy to flow into the body and removing negative energy causing disease. Normally, healer will keep appropriate crystal on forehead, on throat area, on chest, on stomach, on the gut and genital area to align the chakra. Same way crystal can be worn or kept under pillows to ward off disease and absorb positive energy. For example, Amethyst is giving relax related to intestine issues, green aventurine beneficial for heart, etc.
Crystals are earth element, connecting, harmonizing and balancing within human body. Different crystals have different characteristics and used for different purposes based on chart or pointing of problem facing by a person. Whenever chakras are blocked inside a person will get issues related to that chakra. There are 7 chakras in human body as shown in below diagram and its characteristics in table.

| Chakra | Element | Color | Responsible for |
| Root chakra | Earth | Red | Sense of security and stability |
| Sacral chakra | Water | Orange | Sexual and creative energy, also relate to your emotions |
| Solar plexus chakra | Fire | Yellow | Confidence and self-esteem |
| Heart chakra | Air | Green and Pink | All about our ability to love and show compassion |
| Throat chakra | Ether | Blue | Ability to communicate verbally |
| Third eye chakra | Light | Indigo | Intuition. It’s also linked to imagination |
| Crown chakra | None | Violet or White | Your spiritual connection to yourself, others, and the universe. |

क्या है क्रिस्टल थेरेपी?
मानसिक तनाव व शारीरिक समस्या से छुटकारा पाने के लिए क्रिस्टल थेरेपी एक बेस्ट उपाय है। क्रिस्टल थेरेपी को क्रिस्टल हीलिंग भी कहते हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जिसे देखो वो काम के दबाव से परेशान है। इससे लोगों में मानसिक रोग, तनाव जैसी समस्याएं हो रही हैं। तनाव कई रोगों का जड़ है। ऐसे में मानसिक तनाव व शारीरिक समस्या से छुटकारा पाने के लिए क्रिस्टल थेरेपी एक बेस्ट उपाय है। क्रिस्टल थेरेपी में अलग-अलग तरह के पारदर्शी पत्थरों या ट्रांसपेरेंट क्रिस्टल का उपयोग किया जाता है। हर क्रिस्टल की अलग-अलग विशेषता होती है। उन्हीं विशेषताओं के आधार पर इनका उपयोग किया जाता है। ये सभी क्रिस्टल हीट कंडक्टर और ऊर्जा के अच्छे सुचालक होते हैं। इनसे कई तरह के रोगों का उपचार किया जा सकता है।
क्रिस्टल थेरेपी से उपचार
क्रिस्टल थैरेपी जिसे क्रिस्टल हीलिंग भी कहते हैं, शारीरिक और मानसिक बीमारियों का इलाज करने का एक ऐसा प्रकार है जिसमें बिना दवा के व्यक्ति की बीमारी को दूर किया जाता है। इस थेरेपी में शरीर के कुछ निश्चित हिस्सों पर क्रिस्टल रखा या शरीर पर घुमाया जाता है। कहते हैं शरीर में सात चक्र होते हैं जहां पर पूरे शरीर की ऊर्जा एकत्रित रहती है। जब भी किसी चक्र की ऊर्जा असंतुलित होती है, तब शरीर के उस हिस्से में दर्द होने लगता है। क्रिस्टल थेरेपी के जरिए चक्रों को संतुलन में लाया जा सकता है। इससे शारीरिक कष्टों से छुटकारा मिलता है। इस थेरेपी को करने से पहले यह जानना जरूरी है कि किस क्रिस्टल, किस रंग के क्रिस्टल का इस्तेमाल करना चाहिए और इन्हें शरीर के किस हिस्से पर रखने से लाभ होता है। जब इन क्रिस्टल को व्यक्ति के शरीर पर रखा जाता है तब हमारा शरीर इन क्रिस्टल में मौजूद रसायन और खनिज को अपनी ओर खींच लेता है। जिससे इसके सभी गुण हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं।
क्रिस्टल से कैसे होता है इलाज
क्रिस्टल पृथ्वी में पाए जाते हैं, इसके अन्दर रसायन-खनिज होते हैं। जब इन क्रिस्टल को त्वचा पर रखा जाता है, तब त्वचा इन रसायन और खनिज को सोख लेती है, जिससे यह हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। इसकी सबसे खास बात यह है कि हमारा शरीर उतना ही रसायन-खनिज अवशोषित करेगा, जितने की उसको जरूरत है। साथ ही इन क्रिस्टल से कोई भी नकारात्मक प्रभाव नहीं होता है।
क्रिस्टल थेरेपी के लाभ
क्रिस्टल थैरेपी का प्रयोग मुख्य रूप से स्ट्रेस, शारीरिक दर्द, ऐंठन, एंजाइटी, सिर दर्द, शारीरिक और मानसिक कमजोरी, हाथ पैरों में जकड़न, नींद की कमी और याददाश्त कमजोर होने की स्थिति में किया जाता है और यह काफी कारगार भी होता है।
कुछ क्रिस्टल ऐसे भी होते हैं जिन्हें थैरेपी के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है। सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले पत्थरों में एमिथिस्ट, रोडोनाइट, ओपल और गुलाब क्वार्ट्ज शामिल हैं। एमिथिस्ट में ऐसी शक्तियां पाई जाती हैं जो आंतों और पाचन संबंधी समस्याओं के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं। ग्रीन एवेन्ट्यूरिन जैसे पत्थर, हृदय रोगों से बचाने का काम करते हैं, जबकि येलो टोपाज़ जैसे क्रिस्टल दिमागी ब्लॉकेज और डिप्रेशन के लिए प्रयोग किए जाते हैं। बता दें कि जब क्रिस्टल को शरीर पर रखा जाता है तो यह बहुत भारी लगते हैं। लेकिन जब व्यक्ति को पत्थरों का भार सामान्य महसूस होने लगे तो समझ जाना चाहिए कि इलाज हो गया है।
क्रिस्टल हीलिंग की 4 मूलभूत तकनीक
- सफाई – गंदा ऊर्जा को हटाने की प्रक्रिया है.
- चार्ज – प्राणिक ऊर्जा क्रिस्टल में डालने की प्रक्रिया है.
- प्रोग्रामिंग – क्रिस्टल के लिए निर्देश देने की प्रक्रिया है.
- स्थिर – किया जाता है ताकि अवशोषित प्राणिक ऊर्जा क्रिस्टल में लंबे समय तक रहना होगा.
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