पंडित रूपचंद जोशी द्वारा लिखित “लाल किताब” ज्योतिष जगत में एक अमूल्य निधि है। “लाल किताब” के पाँच ऐतिहासिक और मौलिक संस्करणों — “लाल किताब के फरमान” (1939), “लाल किताब के अरमान” (1940), “लाल किताब का हिसाब-किताब – गुटका” (1941), “लाल किताब तरमीमशुदा” (1942), और “इल्म सामुद्रिक की बुनियाद पर लाल किताब” (1952).
पंडित रूप चंद जोशी द्वारा रचित लाल किताब, भारतीय ज्योतिष के सबसे प्रतिष्ठित ग्रंथों में से एक है। यह पुस्तक ज्योतिषीय भविष्यवाणियों को व्यावहारिक उपायों के साथ जोड़ती है, जिनमें अक्सर घरेलू वस्तुओं या आध्यात्मिक प्रथाओं का उपयोग किया जाता है।
लाल किताब कभी भी राशि और भाव को पूरी तरह से भूलने का सुझाव नहीं देती, बल्कि विभिन्न भावों में ग्रहों की स्थिति को बहुत महत्व देती है। इसलिए, विभिन्न भावों में ग्रहों की स्थिति और फिर विभिन्न राशियों में उनकी स्थिति को अधिक महत्व देने का सुझाव दिया जाता है। उदाहरण के लिए, यदि बृहस्पति तुला राशि में प्रथम भाव में स्थित है, तो हम पाराशरी सिद्धांत के अनुसार, अशुभ भावों के स्वामी के रूप में बृहस्पति की शत्रु राशि में स्थिति के बजाय प्रथम भाव में बृहस्पति की स्थिति को अधिक महत्व देंगे।
कुंडली के भाव (जिन्हें घर भी कहते हैं) ज्योतिष में जीवन के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। जन्म कुंडली को 12 भावों में बांटा जाता है, जिनमें से प्रत्येक जीवन के एक खास क्षेत्र को दर्शाता है, जैसे कि व्यक्तित्व (पहला भाव), धन (दूसरा भाव), और विवाह (सातवां भाव)।
प्रथम भाव (लग्न): व्यक्तित्व, स्वभाव, रूप-रंग और शारीरिक बनावट
द्वितीय भाव: धन, परिवार, वाणी और बचत
तृतीय भाव: भाई-बहन, साहस, पराक्रम और संचार
चतुर्थ भाव: माता, संपत्ति, वाहन और घरेलू सुख
पंचम भाव: शिक्षा, बुद्धि, संतान, प्रेम संबंध और रचनात्मकता
छठा भाव: रोग, शत्रु, ऋण और संघर्ष
सातवाँ भाव: विवाह, जीवनसाथी और साझेदारी
आठवाँ भाव: आयु, मृत्यु, रहस्य और विरासत
नवाँ भाव: भाग्य, धर्म, उच्च शिक्षा और लंबी यात्रा
दसवाँ भाव: करियर, पेशा, सामाजिक स्थिति और कर्म
ग्यारहवाँ भाव: आय, लाभ और इच्छाओं की पूर्ति
बारहवाँ भाव: व्यय, मोक्ष और खर्च
मेष, वृषभ और मिथुन राशियाँ तर्जनी (बृहस्पति द्वारा शासित) से ऊपर से नीचे तक जुड़ी होती हैं। इसी प्रकार, कर्क, सिंह और कन्या राशियाँ अनामिका (सूर्य द्वारा शासित) से; तुला, वृश्चिक और धनु राशियाँ कनिष्ठिका (बुध द्वारा शासित) से और मकर, कुंभ, मीन राशियाँ मध्यमा (शनि द्वारा शासित) से जुड़ी होती हैं।
पंडित रूप चंद जी ने माता के लिए चंद्रमा को लिया, दादा, पिता, भाग्य के लिए बृहस्पति, मगरमच्छ और तिल के लिए शनि, भाई के लिए मंगल, आकाश, रेत आदि के लिए बुध; लक्ष्मी, , पत्नी, गाय, मिट्टी आदि के लिए शुक्र, शुभ मंगल के लिए शहद (मंगल नेक) और अशुभ मंगल (मंगल बद) के लिए; “अशुभ” शब्द का प्रयोग तीन ग्रहों अर्थात शनि, राहु और केतु आदि के लिए किया जाता है। मंगल बद या अशुभ मंगल लालच को दर्शाता है जबकि मंगल नेक या शुभ मंगल दान को दर्शाता है।
| घर | पक्का घर | मलिक ग्रह | उच्च के ग्रह | नीच के ग्रह |
| 1 | सूर्य | मंगल | सूर्य | शनि |
| 2 | बृहस्पति | शुक्र | चंद्रमा | |
| 3 | मंगल | बुध | राहु | केतु |
| 4 | चंद्रमा | चंद्रमा | बृहस्पति | मंगल |
| 5 | बृहस्पति | सूर्य | ||
| 6 | केतु | बुध | बुध / राहु | शुक्र / केतु |
| 7 | बुध | शुक्र | शनि | सूर्य |
| 8 | शनि | मंगल | चंद्रमा | |
| 9 | बृहस्पति | बृहस्पति | केतु | राहु |
| 10 | शनि | शनि | मंगल | बृहस्पति |
| 11 | बृहस्पति | शनि | ||
| 12 | राहु | बृहस्पति | शुक्र / केतु | बुध / राहु |
ग्रहों के आपसी संबंध
सूर्य के साथ युति में बुध मौन रहता है।
मंगल के साथ युति में राहु मौन रहता है।
| ग्रह | मित्र ग्रह | शत्रु ग्रह | बराबर के ग्रह |
| बृहस्पति | सूर्य, मंगल और चंद्रमा | बुध और शुक्र | राहु, केतु और शनि |
| सूर्य | बृहस्पति, मंगल और चंद्रमा | शुक्र और शनि, राहु causes ग्रहण whereas afflicts. | बुध |
| चंद्रमा | सूर्य और बुध | केतु causes ग्रहण और राहु afflicts | शुक्र, शनि, मंगल और बृहस्पति |
| शुक्र | शनि, बुध और केतु | सूर्य, चंद्रमा और राहु | मंगल और बृहस्पति |
| मंगल | सूर्य, चंद्रमा और बृहस्पति | बुध – केतु | राहु, शुक्र और शनि |
| बुध | शुक्र, सूर्य और राहु | चंद्रमा | शनि, केतु, मंगल, बृहस्पति |
| शनि | बुध, शुक्र और राहु | सूर्य, मंगल, चंद्रमा | केतु और बृहस्पति |
| राहु | बुध, शनि और केतु | सूर्य, शुक्र और मंगल | बृहस्पति और चंद्रमा |
| केतु | शुक्र और राहु | चंद्रमा – मंगल | बृहस्पति, शनि, बुध, सूर्य |
- संक्षेप में, चंद्रमा और शुक्र बराबर हैं, लेकिन चंद्रमा दुश्मनी करता है शुक्र से।
- बृहस्पति और शुक्र बराबर हैं, लेकिन शुक्र दुश्मनी करता है बृहस्पति से।
- इसी प्रकार, मंगल-शनि बराबर हैं, लेकिन मंगल दुश्मनी करता है शनि से।
- चंद्रमा-बुध दोस्त होते हुए भी, चंद्रमा दुश्मनी करता है बुध से।
- राहु के साथ बृहस्पति चुप होगा, मगर गुम नहीं होगा. विशेष रूप से दूसरे भाव में, मौन रह सकता है, लेकिन अपने परिणाम देगा।
- बुध खाना नं. 2 – 4 हो या चंद्र या बुध+बृहस्पति या चंद्रमा+बुध धन के लिए शुभ परिणाम देगा।
लाल किताब में दोस्त का दोस्त:
सूर्य का परम मित्र चंद्रमा, चंद्रमा का बृहस्पति, बृहस्पति का नेक मंगल, नेक मंगल का परम मित्र है राहु, राहु का बुध, बुध का शनि, शनि का परम मित्र है शुक्र, शुक्र का केतु।
दुश्मन का दुश्मन:
शनि का सूर्य, सूर्य का शुक्र, शुक्र का बृहस्पति, बृहस्पति का बुध, बुध का चंद्रमा, चंद्रमा का केतु, केतु का दुश्मन है मंगल बद, मंगल बद का दुश्मन है राहु।
लालकिताब के अनुसार ग्रह कभी कभी अपने अनुसार अपना फ़ल देते है,और कभी कभी भाव का फ़ल देने लगते है,जिस प्रकार से मंगल पहले भाव का ग्रह फ़ल देता है,तो राहु पहले भाव का भाव फ़ल देता है,उसी प्रकार से –
बृहस्पति
बृहस्पति (गुरु) – बुद्धि और ज्ञान का ग्रह
गुरु – 1 – 5 – 9 Creators (निर्माता)
गुरु – 2 – 6 – 10 Takers (लेने वाले)
गुरु – 3 – 7 – 11 Achievers (साधक / उपलब्धिकर्ता)
गुरु – 4 – 8 – 12 Givers (देने वाले)
| ग्रह | किस-किस घर में मंदा होगा | किस-किस घर के लिए नेक |
| बृहस्पति | 6 – 7 – 10 – 11 | 1 – 5, 8 – 9 – 12 |
| सूर्य | 6 – 7 – 10 | 1 – 5, 8 – 9 – 11 – 12 |
| चंद्रमा | 6 – 8 – 10 – 11 – 12 | 1 – 5, 7 – 9 |
| शुक्र | 1 – 6 – 9 | 2 – 5, 8 – 11 – 12 |
| मंगल | 4 – 8 | 1 – 2 – 3 – 5 – 6 – 7 – 9 – 10 – 11 – 12 |
| बुध | 3 – 8 – 9 – 11 – 12 | 1 – 2 – 4 – 5 – 6 – 7 – 10 |
| शनि | 1 – 4 – 5 – 6 | 2 – 3 – 7 – 8 – 9 – 10 – 11 – 12 |
| राहु | 1 – 2 – 5, 7 – 12 | 3 – 4 – 6 |
| केतु | 3 – 4 – 5 – 6 – 8 | 1 – 2 – 7 – 9 – 10 – 11 – 12 |
लाल किताब में 35 साला चक्र
लाल किताब में 35 साला चक्र का मतलब है कि ग्रहों की महादशा।
35 साला चक्कर
35 साल में सब ग्रह अपना चक्कर पूरा कर लेते है | जो ग्रह अपने पहले 35 साला चक्कर में बुरा असर करते है वो वह अपने दूसरे 35 साला चक्कर में बुरा असर न देंगे लेकिन जरूरी नहीं के नेक असर देंगे |
| ग्रह | असर के साल | किस साल से शुरू – किस साल तक |
| शनि | 6 | 0 – 6 साल |
| राहु | 6 | 7 – 12 |
| केतु | 3 | 13 – 15 |
| बृहस्पति | 6 | 16 – 21 |
| सूर्य | 2 | 22, 23 |
| चंद्रमा | 1 | 24 |
| शुक्र | 3 | 25, 26, 27 |
| मंगल | 6 | 28 – 33 |
| बुध | 2 | 34, 35 |
इसके बाद से फिर उसी क्रम में अगले 35 साल होंगे |
ऐसे 35 साला चक्कर इंसान की औसत 120 साल आयु में पुरे पुरे 3 बार ही आ सकते है |
लाल किताब – ग्रहों की दृष्टि
• प्रथम भाव में स्थित ग्रह सप्तम भाव में स्थित ग्रह को पूर्ण दृष्टि (100%) से देखता है।
• चतुर्थ भाव में स्थित ग्रह दसवें भाव में स्थित ग्रह को पूर्ण दृष्टि (100%) से देखता है।
• तृतीय भाव में स्थित ग्रह नवम और ग्यारहवें भाव में स्थित ग्रह को अर्ध दृष्टि (50%) से देखता है।
• पंचम भाव में स्थित ग्रह नवम भाव में स्थित ग्रह को अर्ध दृष्टि (50%) से देखता है।
• द्वितीय भाव में स्थित ग्रह छठे भाव में स्थित ग्रह को 25% दृष्टि से देखता है।
• 8वें भाव में स्थित ग्रह 12वें भाव में स्थित ग्रह पर 25% दृष्टि तथा दूसरे भाव में स्थित ग्रह पर पूर्ण दृष्टि (100%) डालता है।
ग्रहों की टक्कर से क्या होता है?
- नकारात्मक प्रभाव: ग्रहों की टक्कर से ग्रह के नैसर्गिक शुभ फलों में बाधा आती है.
- समस्याएँ: शत्रु ग्रहों की टक्कर के कारण धन की कमी, शिक्षा में रुकावट, उन्नति में बाधा, और गलत फैसले लेने जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं.
लालकिताब के अनुसार अपनी कुर्बानी देने वाले ग्रह
शत्रु ग्रह आपस में झगडते है,और जब ग्रह आफ़त को झेल नही पाते है,तो अपनी अलामत दूसरे के सिर डालकर बचने की कोशिश करते है,जिस प्रकार से दूसरे भाव में विराजमान बुध चन्द्रमा से बचने के लिये अपनी अलामत शुक्र के ऊपर डालता है,और शुक्र को बुध की अलामत झेलनी पडती है,बहिन अपनी माता से डर कर अपना दोष पत्नी पर डालती है,और पत्नी को माता और बहिन के कारण बलि का कारण बनना पडता है.
शनि और सूर्य की टक्कर में शुक्र का अंत
पिता पुत्र सूर्य और शनि कहे गये है,इनके आपस के झगडे में सूर्य की मार शनि को झेलनी पडती है,शनि वही गुस्सा शुक्र पर उतार देता है,यानी पिता के द्वारा प्रताणना देने पुत्र अपने द्वारा पैदा किये गये प्रताणनात्मक भाव को पत्नी पर उतार देता है,और अगर किसी प्रकार से कुन्डली में शुक्र कमजोर है,तो पत्नी मर जाती है.
ग्रहों के देवता रंग रत्न धातु जानवर शरीर के अंग वस्तुयें
अलग अलग ग्रहों के अलग अलग देवता है और उन्ही के अनुसार रंग है रत्न भी हर ग्रह के अनुसार ही अपना काम करते है उसी प्रकार से ग्रह को पहिचानने के लिये जानवर को भी देखा जाता है शरीर के अंग भी अपने अपने अनुसार ग्रहों का बखान करते है.
| ग्रह | देवता | रंग | रत्न धातु | जानवर | शरीर के अंग | वस्तुयें |
| सूर्य | विष्णु | गेंहुआं | माणिक तांबा | पहाडी गाय बन्दर | पूरा शरीर और शरीर का दाहिना अंग | गेंहूं तांबा तेजपात |
| चन्द्रमा | शिव | दूधिया | मोती चांदी | गोडा घोडी | ह्रदय चेहरे का बायां भाग | चावल |
| मंगल नेक | हनुमान | लाल | बिना चमक वाला मूंगा लोहा | चीता | जिगर ऊपर का होंठ | लाल मसूर की दाल |
| मंगल बद | भूत प्रेत | लाल खूनी | चमकीला मूंगा | ऊंट हिरण | जिगर नीचे का होंठ | शहद पका हुआ मांस |
| बुध | दुर्गा | हरा | पन्ना कांसा | भेड बकरी चमगादड | दिमाग स्नायु नाक का अग्ला हिस्सा जीभ दांत | साबुत मूंग खिलौने |
| गुरु | ब्रह्मा | पीला | सोना पुखराज | शेर शेरनी | गर्दन नाक | चने की दाल हल्दी |
| शुक्र | लक्ष्मी | दही जैसा | हीरा चिकनी मिट्टी | गाय बैल | स्वरयंत्र गाल चाल | मक्खन छाछ कपूर |
| शनि | भैरों | काला | रांगा नीलम काला | भैंस | आंखों के पलक बाल खाल | साबुत उडद सूखे नारियल |
| राहु | सरस्वती | नीला | गोमेद नीलम नीला पंचधातु | जंगली चूहा पतंगे | मस्तिष्क का कंपन थोडी | सरसों काली हल्दी |
| केतु | गणेश | चितकबरा | कैट्स आई त्रिधातु | कुत्ता सूअर गधा छिपकली | धड रीढ की हड्डी जोड पंजे कान | तिल काले सफ़ेद कम्बल |
ग्रह अगर सोया हुआ हो तब उसके सामने परम मित्र को स्थापित कर दें।
लाल किताब की दशा:
| दशा समय | साल | ग्रह की दशा |
| 1 – 6 वर्ष | 6 | शनि |
| 7 – 12 वर्ष | 6 | राहु |
| 13 – 15 वर्ष | 3 | केतु |
| 16 – 21 वर्ष | 6 | बृहस्पति |
| 22 – 23 वर्ष | 2 | सूर्य |
| 24 वर्ष | 1 | चंद्रमा |
| 25 – 27 वर्ष | 3 | शुक्र |
| 28 – 33 वर्ष | 6 | मंगल |
| 34 – 35 वर्ष | 2 | बुध |
35 years round of planets in Lal Kitab.
| Planet | I Cycle | II Cycle | III Cycle | IV Cycle |
| Jupiter | 1 – 6 yrs | 36 – 41 yrs | 71 – 76 yrs | 106 – 111 yrs |
| Sun | 7 – 12 | 42 – 47 | 77 – 82 | 112 – 117 |
| Moon | 13 – 15 | 48 – 50 | 83 – 85 | 118 – 120 |
| Venus | 16 – 21 | 51 – 56 | 86 – 91 | |
| Mars | 22 – 23 | 57 – 58 | 92 – 93 | |
| Mercury | 24th | 59th | 94th | |
| Saturn | 25 – 27 | 60 – 62 | 95 – 97 | |
| Rahu | 28 – 33 | 63 – 68 | 98 – 103 | |
| Ketu | 34 – 35 | 69 – 70 | 104 – 105 |
जन्म दिन और जन्म वक्त का ग्रह और उनका आपसी ताल्लुक
जिस दिन (हिन्दू कैलेंडर के हिसाब से) जन्म हो उस दिन का स्वामी जन्म दिन का ग्रह होगा और जिस समय जन्म हो उस समय का स्वामी जन्म समय का ग्रह होगा |
| जन्म दिन | ग्रह | जन्म वक्त का | ग्रह | |
| रविवार | सूर्य | सूर्य उदय (सुबह 6) से 8 बजे तक | बृहस्पति | |
| सोमवार | चंद्रमा | 8 AM से 10 बजे तक | सूर्य | |
| मंगलवार | मंगल | 10 AM से 11 बजे तक | चंद्रमा | |
| बुधवार | बुध | 11 AM से 1 PM बजे तक | मंगल | |
| गुरुवार | बृहस्पति | 1 PM से 4 PM बजे तक | शुक्र | |
| शुक्रवार | शुक्र | 4 PM से सूर्यास्त तक (शाम 6 बजे) | बुध | |
| शनिवार | शनि | सूर्यास्त से रात होने तक के समय (पक्की शाम) | राहु | |
| सम्पूर्ण रात | शनि | |||
| 4 AM से सूर्य उदय तक | केतु |
सोया हुआ घर को कैसे जगाये:-
पहला घर सोया हो तब सोने / चांदी का चैन पहनने या नाग पहनने जैसा विल हमेशा साथ देगा।
दूसरा घर सोया हो तब 43 दिन तक दूध या चावल मंदिर में डालें, जियासे धन की, परिवार की समस्या खत्म हो जाएगी क्योंकि यहां चंद्रमा ऊंच का होता है। जब शादी हो तब ससुर से आशीर्वाद लें।
तिसरा घर सोया हो तब अपने हाथ की उंगली में अंगुठी पहनने तब जग जाएगा। यहां 9वें और 11वें घर के परम मित्र कभी अंगुठी पहन सकते हैं। 11वें घर या 9वें घर में राहु हो तब भूलकर भी नीलम धारण नहीं करें।
चतुर्थ भाव सोया हो तब चना दाल 400 ग्राम जल प्रवाह करें क्योंकि यहां बृहस्पति ऊंच का होता है।
5वें घर में सूर्य और बृहस्पति का है। यहां सूर्य का कारक जो बृहस्पति से संबंध रखता हो उस पर विचार करें। सरकारी स्कूल के बच्चों को गुड़ के मुरमुरे या गेहूँ के लड्डू 43 दिन तक खिलाएँ। पांचवां घर जग जाएगा.
कुंडली में कामजोर ग्रह ही परेशान देता है। ग्रह कामजोर होगा जब नीच राशि में हो तथा मित्र ग्रह का समर्थन न मिल रहा हो। ग्रह यदि शत्रु ग्रह से टक्कर खाए तब भी कामजोर होगा।
उपाय:
1. कमजोर ग्रह का पता लगाएं, फिर उस ग्रह की रतन धारण करें, जो बहुत मजबूत होगा।
2. कामजोर ग्रह के संबंध चीजों को भोजन में शामिल करें या शरीर पर धारण करें।
3. कामजोर ग्रह से संबंध चीज को अपने आस पास रखे, जिसे ग्रह को ताकत मिलेगी। उदाहरण: बुध ग्रह कामजोर हो तब पन्ना रतन धरन करे। खाने में हारा चीज़ जैसा आँवला उपयोग करें। बुध 12वें घर में हो तब पन्ना के उपरत्न को गले में धारण न करें।
आठवें भाव के राहु का उपाय होता है क्या करना चाहिए कृपया कोई बताएं
बिना पूरी कुंडली देखे, कुछ सार्वभौमिक और सरल उपाय हैं जिन्हें कोई भी व्यक्ति आठवें घर के राहु के अशुभ प्रभाव को कम करने के लिए कर सकता है:
यहाँ सबसे कारगर और आसान उपाय दिए गए हैं:
चांदी का चौकोर टुकड़ा:
हमेशा अपने पास या अपनी जेब में एक ठोस चांदी का चौकोर टुकड़ा रखें। लाल किताब में यह उपाय आठवें घर के राहु के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है। यह राहु की नकारात्मक ऊर्जा को सोख लेता है।
बहते पानी में नारियल बहाना:
प्रत्येक शनिवार को या महीने में एक बार एक सूखा नारियल (जटा वाला) बहते हुए पानी (नदी या नहर) में प्रवाहित करें। यह अचानक आने वाली मुसीबतों को टालता है।
रात को सिरहाने पानी रखना:
रात को सोते समय अपने सिरहाने के पास एक गिलास या बर्तन में पानी भरकर रखें। सुबह उठकर इस पानी को शौचालय में फ्लश कर दें या घर से बाहर फेंक दें (पौधे में न डालें)। यह उपाय 40 या 43 दिन तक लगातार करें।
मां का आशीर्वाद और चांदी:
अपनी माँ से अच्छे संबंध बनाए रखें और उनसे आशीर्वाद लें। यदि संभव हो तो अपनी माँ से चांदी (कोई सिक्का या छोटी वस्तु) उपहार के रूप में लें और उसे अपने पास सुरक्षित रखें।
शराब और मांसाहार से परहेज़:
आठवें घर का राहु होने पर शराब, सिगरेट और मांसाहार का सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए। ये आदतें राहु के बुरे प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती हैं।
इलेक्ट्रॉनिक सामान का दान:
पुराने या खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, जैसे मोबाइल, घड़ियाँ, या अन्य गैजेट्स को घर में इकट्ठा न करें। उन्हें या तो ठीक कराएँ या दान कर दें/बेच दें.
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